• ayushsinghania 17w

    कितना हसीं हो जाता है ना,
    बारिश के आँखों को मलने के बाद,
    हर नज़ारा,
    जैसे जमी धूल की परत पर,
    नमी को बरसाया गया हो,
    बरसात के होंठो से आंखों को चूमा गया हो,
    नज़रो को नई सोच मिली हो,
    जैसे रेगिस्तान में कोई उम्मीद मिली हो,
    दरिया में डूबे को दरख़्त का सहारा जैसे,
    हरे पत्तों के जिस्म पे ठहरा सफेद नज़ारा जैसे,
    मल्हार , मिट्टी की सुगंध और बदन को सिहराती वो हवा,
    एक मन में कितनी कहानियां दोहराती हो जैसे,
    प्रेम , बचपन , यारी सबकुछ,
    बारिश के अलग अलग से लम्हें हो जैसे....!
    ©ayushsinghania