• succhiii 29w

    ग़ज़ल इंतिहा

    यही है इंतिहा तो इब्तिदा क्या है
    तुम्हीं बतलाओ अब ये माजरा क्या है ।

    दिलो में जब नहीं है क़ोई भी दूरी ……
    तो बतलाओ मियाँ , ये फ़ासला क्या है ।

    अना के शाख़ पे कलियाँ मोहब्बत की ..
    यूँ ही गर सूख जाए , सोचना क्या है ।

    बहुत नख़रे हैं ज़ालिम ज़िंदगी तेरे ..
    दुआ भी काम ना आई , दवा क्या है ।

    लहू अश्को का दरिया बन के निकला है ..
    बता मेरे खुदा तेरी रज़ा क्या है ।

    @succhiiI