• succhiii 28w

    मीटर 122 122 122.

    दर्द बढ़ कर फ़ुग़ाँ न हो जाए
    ये जमी आसमाँ न हो जाए

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    ग़ज़ल

    यूँ रस्ता भी देखे न कोई
    कि टूटे यूँ , बिखरे न कोई ।

    बहे जाये आँखों से काजल ..
    रुलाए यूँ …….रूठे न कोई ।

    बिछड़ जा ! बिछड़ना अगर है ..
    यूँ मुड़ -मुड़ के देखे न कोई ।

    जो है आज में है , अभी है ..
    सो कल की ख़बर ले न कोई।

    है अब संग यादो का बस्ता ..
    सहारा ये छीने न कोई ।


    ©succhiii