• deepvishu 11w

    वो ऐसी है जो किसी से डरती नहीं है,
    किसी के भी कहने पर ठहरती नही हैं...
    वो आज़ाद पंछी है , इस शहर की एक ,
    किसी के पहलू भी में ठहरती नहीं है..।

    कुछ भी कहने से पहले उसको ,
    तुम्हे सर को झुकाना पड़ेगा ,
    हृदय को उसके रिझाना पड़ेगा ,
    फ़लक पे जो चांद सजा है,
    जमीं पर उसको लाना पड़ेगा...।।

    वो कहती नहीं है कुछ अपनी ज़ुबाँ से
    दिख जायेगा, नज़रों में उसके है सब
    कहना क्या हैं ? करना है क्या?
    बिन कहे खुद ही समझ जाना सब।।

    अगर की हो तुमने भूल से ग़लती कोई
    मांग लेना माफ़ी, अपनी गरदन झुका के,
    अगर जो मिलाते रहे तुम उससे नजरें ,
    कर के कौड़ी तेरा ग़ुरूर , फ़ेंक देगी उठाके।

    ©deepvishu