• shilpa_be_ias 8w

    सफर

    चली थी मंजिल के खातिर, वो रास्ता तमाम हुआ,
    में गुजरती रही और सफर ने आशमान छूआ |

    कई यारो-दोस्तों का मिला सहारा,
    इसी बिच तुम आकर कर दिया इशारा |

    सफर के खातिर नींद भी खोने लगी,
    हम न सोये लेकिन रात थक कर सोने लगी |

    ©Shilpa