• rangkarmi_anuj 6w

    पोइ

    एक पँछी इंतज़ार कर रहा था
    मैना का इश्क़ की डाल पर,
    वो डाल उसका आशियाना था
    वो उसकी मोहब्बत का बसेरा था,
    वो था मैना का आँगन जिसके इंतज़ार में
    पँछी इश्क़ के डाल पर बैठा हुआ था।
    मैना नहीं आ सकती थी
    उसे बंद कर दिया था क़ैदख़ाने में,
    उसका ज़ुर्म इतना ही था कि उसने
    चुराए थे पोइ के फल से महावर
    जिसे पैर में लगाकर पँछी की डाल पर
    बैठने वाली थी।

    पँछी सब बातों से बेख़बरअपने सपने में गुम
    पत्ती जमा कर रहा था जाड़े से बचने के लिए,
    सपने में उसने ऊन की
    छत भी पक्की कर ली,
    उसमें से सिर्फ़ धूप आएगी,
    ठंडी हवा के लिए कोई भी कोना
    नहीं दिया, क्योंकि
    उसकी वजह से मैना को तकलीफ़ होती,
    पँछी के सपने सुनहरे थे
    पर मैना की आरज़ू घने कोहरे जैसे,
    वो ऐसी जगह पर फंस गई थी
    जिससे निकलने के लिए
    तेज़ धूप की ज़रूरत होती थी
    जिससे वो कोहरा छट जाए,
    पर पोइ के फल से महावर चुराना
    उसके लिए बहुत महंगा साबित हुआ।

    पँछी इश्क़ की डाल पर
    बैठ कर जाड़े से लड़ेगा,
    क्योंकि वो घर के बाहर सोता है
    मैना का इंतज़ार करता है,
    मैना या तो मर जाएगी या
    पँछी का इंतज़ार करेगी,
    जिससे उसका वो हाल देख सके
    पर इंतज़ार दोनों कर रहे हैं
    पँछी अपनी डाल पर
    और मैना अपने पिंजड़े पर
    जिसका जुर्म था पोइ के
    फल से महावर चुराना।
    ©अनुज शुक्ल "अक्स"
    ©rangkarmi_anuj