• protonsrish 151w

    सुनो
    मुझे मालूम है की जब नही देख रही होती हुँ तुम्हे तो तुम मुझे ही देखा करते हो,ये नजरें मिलने पर अंजान ना बना करो
    तुम्हरे वो इशारे भी खूब समझती हूँ मै जिसमे ये कहते हो मुझसे की अच्छा बाकी सब तो ठीक है पर याद रखना मोहब्बत बडी करता हु तुमसे
    तुम्हारे चेहरे की वो हरकते भी भाप लेती हुँ मैं जब बताती हुँ तुम्हे की आज ना वो लड़का घूर रहा था मुझे,तुम्हारी आवाज़ तो ये कहती है की इतनी खूबसुरत हो तुम तो तुम्हे तो सब देखेगें ही पर चेहरा जो तुम्हरा है वो बोलता है की हिम्मत कैसे हुई उसकी,तुम सिर्फ मेरी हो और तुम्हे कोई देख भी नही सकता है।
    सुन लेती हुँ वो सारी बातें जो तुम्हारे होठ बयाँ नही कर पाते है,तुम्हारी सांसो की लय से पता लगा लेती हुँ की दिन ठीक गया या थोड़ा थोड़ा बुरा सा।
    हाँ झगड़ती हुए कहती हुँ की जो महसूस करते हो बोलते क्यूँ,वो सिर्फ इसलिये की चाहती हुँ की ऐसी कोई बात तुमसे सुननी ना रह जाये जो तुम मेरी तारीफ में कहना चाहते हो।
    हर चीज़ पसन्द है तुम्हारी और तुम भी।
    और बस बात इतनी सी है की तुम्हारे इशारे भी समझ आते है मुझे और तुम्हारी खामोशी भी।
    ©Srishti