• asma7khan 58w

    अंजाम तो सबसे छिपा नहीं है
    कि इश्क में अब मज़ा नहीं है

    आधे सफर में है ज़िंदगी मिरी
    कि मोहब्बत में अभी सज़ा नहीं है

    दूर से ही देखता हूँ उसको मैं
    अब तलक उससे कुछ कहा नहीं है

    बेहया समझो या बेकाबू तुम जानो
    दिल ये अब मेरा रहा नहीं है

    हर मुश्क मौजूद है वो महबूब मेरा
    क्या कहूँ कि वो कहाँ नहीं है

    बहुत हसीन है बेशक वो मगर
    क्यों कहूँ मेरा, जब वो मेरा नहीं है

    ©asma7khan