• anusugandh 7w

    बचपन एक याद

    बचपन को भूलना क्या इतना आसान
    वो भी क्या दिन थे दिल था नादान

    गुड्डे गुड़ियों की शादी रचाना
    सबके साथ मिलकर वह खिलखिलाना

    ना भूले हैं अबतक ना भूलेंगे कभी तक
    यादों के सिक्के खनकते हैं आज तक

    स्टापू खेलना और गिट्टे बजाना
    पूरा दिन मस्ती में बिताना

    हाथ होंगे सख्त चूड़ी भी ना आएंगी
    मां का प्यार से यह सब समझाना

    क्या याद करूं क्या भूलने की बात करूं
    हर छोटी छोटी बात पर बचपन तुझे याद करूं

    पता है ना लौटा है हर बीतने वाला पल
    बस अब यादों में ही जी लो जो बीत गया पल

    बचपन की यादों के अब सपने सजाते हैं
    चलो बचपन को अपने बच्चों में लौटा लाते हैं

    सुनते थे दादी नानी के अजूबे से किस्से
    जिंदगी के बन गए आज खूबसूरत हिस्से

    उन हिस्सों में फिर पल-पल दिन बिताते हैं
    चलो बचपन की यादों को फिर से लौटा लाते हैं
    ©anusugandh