• radhika_1234569 18w

    ना वादों ने तुझे रोका , ना शब्दो ने तुझे टोका
    पत्थर के आगे हाय,मेरा दिल क्यों भला रोता l

    कभी पल में चहकते, कभी बेवक़्त बरसते थे
    कोई खिलौना नहीं हूँ जी ,खेल के सिरकते थे l

    कभी लफ्ज़ो कभी नैनों से, क्या नहीं बताते थे
    एक बहरे के आगे क्यों ,भला हम गुनगुनाते थे l

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    बड़ी मग़रूर सी लगती थी तेरी चाहत तेरी हस्ती
    मेरी ख़ामोशी के आलम से हिल गयी तेरी कश्ती!








    ©radhika_1234569