• divine_love_words 30w

    कि अबकी दफ़ा पुराने सब हिसाब करता गया कोई
    कपड़े-लत्ते, रुपये-पैसे बकाए के, लेता गया कोई
    समेट कर ऐसे गया कोई यादें बची नहीं
    शब्द जब्त हो गए, दरम्यां मौन खिंची रही
    बची रही मेरे हाथों बनी उसकी "भद्दी" सी एक स्केच
    कमरे से जहन तक आज भी वही खिंची रही

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