• dipps_ 19w

    ग़ज़ल

    जागता हूं रातो को, सोना भी भूल गया हूं,
    तेरे बाद मैं किसिका होना भी भूल गया हूं!

    ख़्वाब बनकर मिले है वो, यूं ख़्वाब में ऐसे,
    आंखों को अपनी मैं धोना भी भूल गया हूं!

    वो कहते थे के जादू है, मुस्कुराहट में मेरी,
    अब तो शायद मैं वो टोना भी भूल गया हूं!

    तुमको भरम है ये , तो ये भरम ही ठीक है,
    पत्थर है दिल मेरा,मैं रोना भी भूल गया हूं!
    ©dipps_