• hindikavita 66w

    मैं चंचल तेज कटारी सी
    तुम शान्त नदी का धार प्रिये
    मैं सुलग रही चिंगारी सी
    तुम बुझा हुआ अंगार प्रीये
    मैं नौका के सवारी सी
    जिसके हो तुम पतवार प्रीये
    मैं नन्हीं राजकुमारी सी
    जिसके तुम राजकुमार प्रीये

    मैं रमदान की इफ्तारी सी
    तुम रोज़े का निसार प्रीये
    मैं छोटी नन्हीं क्यारी सी
    तुम उसमे बहता धार प्रीये
    मैं खुली हुई तिज़ोरी सी
    जिसके तुम पहरेदार प्रीये
    मैं भावुक चित्रकारी सी
    जिसमें छुपा तुम सार प्रीये

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