• bal_ram_pandey 63w

    जीवन एक संघर्ष है ����

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    जीवन के तप में फल ,
    कब निष्फल होता है ,
    कष्ट देखकर मानव ,
    किंचित क्यों रोता है ...........।।

    चीर संघर्ष से माटी ,
    है बन जाती सोना ,
    स्वेद सिंचित खेतों में ,
    लहललाये फसल सलोना,
    कर्म के पंख दिए दाता ने ,
    क्यों उम्मीदें खोता है ,
    कष्ट देखकर मानव ,
    किंचित क्यों रोता है..............।।

    जीवन है स्वप्न सरोवर ,
    इसमें क्या रोना - धोना ,
    शेष है जीवन ,अवरुद्ध परंतु
    गांठ लगा मन में क्या सोना ,
    बंजर उम्मीदों की छाती पर ,
    क्यों आशा के सूरज न ब़ोता है ,
    कष्ट देखकर मानव
    किंचित क्यों रोता है...............।।
    ©bal_ram_pandey