• alkatripathi79 8w

    वो

    वो सूखी पंखुड़ियाँ.. आज भी है

    वो सूखी पंखुड़ियाँ, जिसमे थी गज़ब की कोमलता
    उसका वो गुलाबी रंग...
    अब नही है उसमें,, ना वो रंग ना वो कोमलता फिर भी,
    याद दिलाती है किसी अपने की,
    जो था मेरा नितांत अपना।

    वो सूखी पंखुड़ियाँ, जिसमे थे कुछ पराग भी
    और थी इक अनोखी ख़ुशबु
    अब नही आती उसमें से कोई ख़ुशबु
    फिर वो याद दिलाती है उसकी
    जिसकी ख़ुशबु से ही उसे पहचान जाती थी,
    जो था मेरा नितांत अपना।

    वो सूखी पंखुड़ियाँ, जुड़ी थी इक टहनी से
    उसमें थी इक नाजुकता, और था उसका हरा रंग
    अब कुछ भी नही बचा, उसके रिश्ते की तरह
    मगर आज भी महसूस करती हूँ
    उस टहनी पर उसकी उंगलियों की गर्माहट..
    जो था मेरा नितांत अपना।

    वो सूखी पंखुड़ियाँ आज भी ज़िंदा है
    मेरे डायरी के पन्नों के बीच
    जो हर पल याद दिलाती है
    कोई तो था कभी मेरा नितांत अपना।

    ©alkatripathi79