• mamtapoet 86w

    ऐ खुदा तेरी दी हुई साँसों की नेमत की,
    किश्त कुछ यूँ अदा कर रहा हूँ मैं,


    तोहमत न लगे तेरी नेमत पर,
    रोज न जाने कितनी मौत मर के,
    फिर नई उम्मीद से जिंदा हो रहा हूँ मैं।।
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    ©mamtapoet