• my_sky_is_falling 9w

    ग़ज़ल

    दोस्त भी बना रखे है और दोस्ती भी रखी है
    हां मगर सबके दरमियां कुछ दूरी भी रखी है

    खोल तो देता मैं बेशक यादों का पिटारा पर
    चूड़ियां कंगन जैसी चीजें जरूरी भी रखी है

    ऐसा नहीं है कि हर्फ-दर-हर्फ लिखता रहा हूं
    डायरी में चंद ग़ज़लें अभी अधूरी भी रखी है

    क्या गज़ब अंदाज़-ए-इश्क है मेरे महबूब का
    एक हाथ में फ़ूल तो दूसरे में छुरी भी रखी है
    ©my_sky_is_falling