• ajaykrsingh123 12w

    पैगाम-ए-जाम

    छलकते अल्फाजों से मैं वो पैग़ाम लिखता हूँ,
    तुम तस्सली से पी सको मैं वो जाम लिखता हूँ।

    महफ़िल-ए-सफ़र को तुम बर्बाद मत करना,
    जो तुम्हें भूल गया उसे तुम याद मत करना।

    अधर से हलक तक तेरे जब ये जाम उतरेगा,
    दिल की दीवारों से महबूब का नाम उतरेगा।

    आज तुम डूब कर पीना ज़रा भी होश न रहे,
    हर दर्द डुबो देना कहीं कोई अफसोस न रहे।

    नशा जब तक दोनों का एक सा हो नहीं जाता,
    दर्द इश्क़ और तन्हाई का सारा खो नहीं जाता।

    तकल्लुफ जानकर के तुम पीना छोड़ न देना,
    इश्क़ साथ ना हो फिर भी जीना छोड़ न देना।

    छलकते अल्फाजों से मैं वो पैग़ाम लिखता हूँ,
    तुम तस्सली से पी सको मैं वो जाम लिखता हूँ।
    ©ajaykrsingh123