• chouhanmamta 10w

    ❤तू है वो एहसास मेरा,
    लफ़्ज़ों में ना भर सकूं,

    कह सकूं, ना लिख सकूं,
    मैं कुछ बयां ना कर सकूं।

    किस तरह से मैं कहूँ के तू,
    क्या है मेरे वास्ते।

    ज़िंदगी तू, बंदगी तू,
    तू दुआ जरूरत है,

    रहनुमा रहमान सी,
    मेरी रूह में आबाद है।

    किस तरहा से मैं कहूँ के तू,
    क्या है मेरे वास्ते।

    हूर से बेहतर कहूँ,
    कोहनूर से भी कीमती,

    तू ही महफ़िल, तू ही मंजिल ,
    तू ही जश्ने-ज़िंदगी।

    किस तरहा से मैं कहूँ के तू,
    क्या है मेरे वास्ते।

    तू ही ताकत, तू ही बरकत,
    तू ही दौलत है मेरी,

    सांस तू है, तू है धड़कन,
    तू ही तो आदत मेरी,

    किस तरहा से मैं कहूँ के तू,
    क्या है मेरे वास्ते।

    तू मुहब्बत इश्क मेरा,
    तू इबादत है मेरी,

    सच कहूँ तो, ज़िंदगी को,
    बस जरूरत है तेरी।

    किस तरहा से मैं कहूँ कि तू,
    क्या है मेरे वास्ते।

    तू सुकूं है, तू ही राहत,
    तू तसल्ली है मेरी,

    तू मेरा अरमान, मेरी शान,
    तू किस्मत मेरी।

    किस तरहा से मैं कहूँ कि तू,
    क्या है मेरे वास्ते।

    तू ही तो मंजिल है मेरी,
    तुझ तलक मेरे रास्ते,

    तू खुदाई नूर सा एहसास,
    मेरे वास्ते।

    किस तरहा से मैं कहूँ कि तू,
    क्या है मेरे वास्ते।।
    ©chouhanmamta