• soumyatiwari02 36w

    यह भारत भूमि!
    जिसका युगों-युगों से है सम्मान,
    ऐसी भारत भूमि को करूं,
    कोटि-कोटि प्रणाम !

    हुई जीत सत्य ,धर्म और नीति की,
    रघुकुल की पवित्र कीर्ति की,
    जन्में जब कृपा निधान।
    ऐसे भारत भूमि को करूं,
    कोटि-कोटि प्रणाम।।

    जब कंस मामा का पाप बढ़ा,
    हर ओर पापियों का शोर बढ़ा,
    आई तब देवकी की आठवीं संतान।
    ऐसी भारत भूमि को करूं
    कोटि-कोटि प्रणाम।।

    ऋषि मुनियों का देश रहा है
    नृत्य ,संगीत सब विशेष रहा है,
    यहीं शुरू हुआ योग और ध्यान।
    ऐसी भारत भूमि को करूं
    कोटि-कोटि प्रणाम ।।

    हर भाषा अपने में प्रसिद्ध है,
    संस्कृत से ही सब सिद्ध है,
    यहां की हर भाषा है महान।
    ऐसी भारत भूमि को करूं
    कोटि-कोटि प्रणाम।।

    मंदोदरी ने शतरंज का खोज किया था,
    आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार किया था,
    यहीं का है पुष्पक विमान ।
    ऐसी भारत भूमि को करूं
    कोटि-कोटि प्रणाम।।

    आजादी की लड़ाई में,
    संघर्ष की चढ़ाई में,
    शहीद हुए थे वीर जवान।
    ऐसी भारत भूमि को करूं
    कोटि-कोटि प्रणाम।।

    यहां की करोड़ों आबादी ने,
    महान आत्मा गांधी ने,
    आजाद कराया हिंदुस्तान।
    ऐसी भारत भूमि को करूं
    कोटि-कोटि प्रणाम।।

    गंगा जमुना सब है सदियों से,
    यहां की पावन नदियों से,
    मिटें पाप जो करे स्नान ।
    ऐसी भारत भूमि को करूं
    कोटि-कोटि प्रणाम।।

    धरती यहां की मां कहलाती,
    पर्वत, वायु ,जल ,अग्नि सब पूजी जाती,
    सब करें यहां अतिथि का सम्मान।
    ऐसी भारत भूमि को करूं
    कोटि-कोटि प्रणाम।।

    सलाम है यहां के लोगों की,
    पवित्रता चारों युगों की,
    हर युग से मिला है ज्ञान।
    ऐसी भारत भूमि को करूं
    कोटि-कोटि प्रणाम।।

    नमन है इस प्रेम के सागर को,
    ममता से भरी गागर को,
    दे सकती हूं इसके लिए जान।
    ऐसी भारत भूमि को करूं,
    कोटि-कोटि प्रणाम।।
    कोटि-कोटि प्रणाम।।
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    -->सौम्या तिवारी



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    कोटि-कोटि प्रणाम!
    ©soumyatiwari02