• divine_love_words 58w

    जीवन के जिस रूप की
    हृदय में बसी थी कामना
    धरती से जुड़ी रहूँ
    और आकाश भी था मापना

    मन-अनल जो धुल सके
    पवित्र करे जो आत्मा
    कर सकूँ स्वयं को समर्पित
    राजे तुम वही हो भावना

    भौतिकता के भोग से
    लोभ के संजोग से
    जो रखे परे, संबल करे
    तेरा वही हाथ मुझको थामना
    तेरा वही हाथ मुझको थामना
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