• bal_ram_pandey 61w

    मां के आंचल तले मेरा सर रहे
    अनजान बलाओं से दिल बेखबर रहे

    हर तरफ़ है अंधेरा गिले-शिकवों का
    एक चिराग़ हर- पल मेरे घर रहे

    तू आसमां है भला ‌भूलूं यह कैसे
    हर हरकत पर मेरी तेरी नज़र रहे

    मां है नगीना ‌ आंखों का नूर मेरे
    दुआओं से आबाद तेरे घर दफ़्तर रहे

    हर ख्वाबों की तासीर ही तुझसे है
    बावस्ता तुझसे सांसो का सफ़र रहे

    आरती अज़ान हो जाती कबूल मेरी
    मौजूद सामने तेरा वजूद अगर रहे

    ©bal_ram_pandey