• hylzarie 27w

    समझ बैठी थी तुझे हम-नफ्स
    तेरी झूठी हसरत लिए बैठी थी
    मोहब्बत कुछ इस कदर की थी तुझसे-
    तेरी बेवफ़ाई भी मक्बूल थी तेरी हर गलती हमे क़ुबूल थी
    वो जो तेरे बे-माना उज़्र थे वो भी क़ुबूल थे
    फिर भी मेरे हर लफ़्ज़ मे तेरे लिए तफ़क्कुर थे।।।
    पर तेरी मोहब्बत मसनूई निकली
    जितनी शीरी उससे कई अधिक तल्ख़ निकली
    या यूँ कह लो शायद मेरी ही तवक़्क़ो कुछ अधिक थी
    समझ तो पहले ही आ गया था हमे
    वो तेरी मोहब्बत नहीं महज़ मेरी ग़लतफ़ेहमी ही थी
    इसीलिए तुझे रोका नहीं जाने से उस दिन मेरी आवाज़ कुछ सहमी और आँखो मे नमी सी थी
    नहीं हैं तुझसे कोई भी अदावत मेरी उन्स ही इतनी गहरी थी
    तू सलामत रहे हमेशा तेरे जाने के बाद यही आखरी दुआ मेरे लफ़्ज़ों मे ठहरी थी।।।
    ©Aashi