• ramaiyya 85w

    ख़ार- कांटे
    रुखसार- गाल

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    ग़ज़ल ९

    लगे बिन ते'रे सब कली ख़ार जैसी,
    लगे जीत भी सब बुरी हार जैसी।

    शिकायत भरा जब से' लहज़ा हुआ है,
    फिज़ा में चुभन है जी' तकरार जैसी।

    हया से गुलाबी ये' रुखसार दोनों,
    निशानी मुहब्बत के' बीमार जैसी।

    नज़र में शरारत लबों पर हँसी थी,
    कशिश थी 'नहीं' में भी इकरार जैसी।

    'रमन' ने लिया नाम बस यार का, तो,
    ग़ज़ल खूबसूरत हुई यार जैसी।

    रमन यादव

    ©ramaiyya