• alkatripathi 13w

    बेतरतीब बिखरे ज़ख्मों को समेट कर
    रोज उनपर मरहम लगाती हूँ
    क्या ख़ूब हुनर हमने पाई है
    दर्द के साये में रहकर भी
    हरपल मुस्कुराती हूँ

    ©alkatripathi