• gunjit_jain 37w

    पता हर हाल में घर को सजाना जानती है माँ,
    अगर घर में कोई रूठे मनाना जानती है माँ।

    नहीं रहता ख़फ़ा घर में कोई मेरे सुनो दुनिया,
    कभी जो कोई रोया तो हँसाना जानती है माँ।

    लकीरों से न घबराए सितारों से भी लड़ जाए,
    हुनर तक़दीर को कैसे मनाना जानती है माँ।

    नहीं है ख़ौफ़ हमको अब बता दो ये ज़माने को,
    ज़हर को भी सुनो अमृत बनाना जानती है माँ।

    है कहते नासमझ उसको मगर है वो सयानी सच,
    हो कोई बोझ हँसके सब उठाना जानती है माँ।

    हँसी से कब हुआ ज़ाहिर बताओ ग़म कभी उसका,
    मिला जो दर्द तो कैसे छुपाना जानती है माँ।

    उठा तूफान जब बेख़ौफ़ लड़ जाती है दीवानी,
    है मुश्किल हर जगह रब ही का आना जानती है माँ।
    ©नौशाद मुहम्मद

    #nayab_naushad
    1222 1222 1222 1222

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    तबस्सुम बाँटने का हर बहाना जानती है माँ,
    यकीनन उस खुदा का दर सुहाना जानती है माँ।

    ज़माने के ग़मों से है भरी दुनिया हमारी ये,
    सभी की ज़िंदगी से ग़म चुराना जानती है माँ।

    असर करती दुआ माँ की दवाओं से भी ज्यादा है,
    दुआ से आसमाँ को भी झुकाना जानती है माँ।

    लबों पर मुस्कुराहट इक दिखाती है हमें अक्सर,
    मिरी हर एक खुशियों का ठिकाना जानती है माँ।

    निकाले रास्ता हँसकर सभी की मुश्किलों का वो,
    महज़ इस प्यार से रिश्ते निभाना जानती है माँ।

    जहां में नफरतों के ज़ख़्म लगते सब पुराने हैं,
    मुहब्बत से भरा मरहम लगाना जानती है माँ।

    अधूरा है जहां सारा बिना माँ के सुना गुंजित,
    मकानों को यहाँ इक घर बनाना जानती है माँ।
    ©गुंजित जैन