• tortoise 23w

    अनकहे जज़्बात

    बेबस ख्यालों से घिरी, एक हसीना है यहां,
    अजनबी अनजानी सी कोई कहानी है यहां।

    तुम आओ तो सही, एक तड़पती परछाई हूं,
    तुम्हारे आलिंगन के लिए एक सदी से प्यासी हूं।

    जो रही भागती इकरार से, वो स्वीकृति आ गई,
    मेरी होठों की लकीरें मानो तेरे बदन पर छा गई।

    हर रात मिलती है बहाना बनाने की,
    कि मरते हैं उन पर ये बात बताने की।

    जो मिल जाएं वो, तो बेकरारी की मौत हो जाए,
    कि उनके प्रेम रस से हमारे सारे पाप ही धुल जाए।

    दूरियों को कर दो अब कोई यूं तबाह,
    देह का हश्र जैसे होता है मिट्टी में स्वः।

    बचकानी बातों से लैस एक खिलौना हूं मैं,
    तुम जो सहलादो मेरे माथे को, तो गुड़िया हूं मैं।

    कभी मां, कभी भाई, तो कभी दोस्त बन जाते हैं वो,
    परिवार से दूर हो कर भी, घर का एहसास दिलाते हैं वो।

    कुछ अधूरी सी, कुछ पूरी सी, एक अजीब कहानी है यहां,
    हजारों हसरतों से हासिल हुई हसीना की हकीकत है यहां!

    ©tortoise