• succhiii 28w

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    1222 1222 122

    कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा
    मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा
    - कैफ़ भोपाली

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    ग़ज़ल

    गुमां होता है हर -पल मुझको कोई
    सदा देता है पल-पल तुझको कोई ।

    रखे हैं तेरे ख़त सम्भाल अब -तक ..
    कि आहट हो कोई , दस्तक हो कोई ..

    शबे- फुरकत कभी ,ख़त्म हो मौला ..
    सहर की भी दिखे सूरत तो कोई ।

    महक उठती दरो-दीवार घर की ..
    सबा लाती तेरी ख़ुशबू जो कोई ।

    तेरा ग़म है, तू है ,तो रौशनी है …
    वगरना जीस्त बेमक़सद हो कोई ।
    @succhiii