• vinaypandey84 8w

    महज़ ख्याल भर से खुशी इतनी है,
    तो हक़ीक़त मै रूबरू हुए तो आशिक़ी कितनी होगी,
    क्या मिलकर बिछड़ना यही आशिक़ी थी।।
    कब अधूरा प्यार किसी और का प्यार हो गया समझा ही नहीं,
    मिले जब दोबारा तो आशिकी भी शरमाई थी।।
    पैहले जिन आंखो में ख़्वाब बस्ते थे
    अब उन आंखों मे शर्म और हया उतर आई थी,
    मन ही मन दोनों के जैहन में सवालों
    की एक लंबी कतार सी थी।।
    बस पैहले पहल कोन करे आशिकी भी इसी इंतजार में थी...✍️विनय पांडे
    ©vinaypandey84