• a_novice_speaks 44w

    अरे नादान दिल क्यों इंतज़ार किसी का,
    किसी को भी अब तेरी जरूरत नहीं है,
    छोड़ो, क्या रूठना किसी से किसी बात पे,
    मनाने की फुरसत यहां किसी को नहीं है!
    बुझ जाए शमा तो नई जला लेते हैं लोग,
    बुझती शमा को बचाने की इंसानी फ़ितरत नही है,
    सुनो, गुल ऐ मोहब्बत कहीं और जाओ,
    उजड़ते चमन को फिर से बसाने की कोशिश करे
    अब इतनी मेहनत की आदत किसी को नही है!
    वो लैला वो मजनू वो फरहाद-शीरी कहाँ ढूंढते हो,
    जो हीरों से भी ना तौली जा पाए,
    ऐसी ख़ालिस मोहब्बत अब किसी दिल मे बसती नही है !!

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