• rajkssora 51w

    ख़त

    नाम तुम्हारे एक ख़त लिख रहा हूँ
    मालूम है कि बेमतलब लिख रहा हूँ
    पर जब तुम इसे पढ़ रहे होंगे
    हर्फ़ दर हर्फ़ आगे बढ़ रहे होंगे
    नाम अपना पढ़कर तुम मुस्कुराओगे
    तुम बिना रुके बस पढ़ते ही जाओगे
    ना तुम्हे पराया और ना अपना लिखूंगा ,
    तुम्हे जागती आँखों का कोई हसीन सपना लिखूंगा
    ना आस लिखा मिलेगा तुम्हे पाने का
    ना प्यास लिखा मिलेगा तुम्हे अपना बनाने का
    मैं कुछ बाते जानकर अधूरा लिख जाऊंगा
    पर तुम्हारे हर सवाल का जवाब पूरा लिख जाऊंगा
    तुमसे जो है शिकायत सब लिखूंगा
    क्यूँ हो रही है तुमसे मुहब्बत अब लिखूंगा
    मैं भी इतना नहीं जानता स्वयं को
    तुम कैसे जानते हो इतना मेरे मन को
    तुम्ही कहो नीरस मेरे जज़्बात है क्या ?
    चाहना किसी को गलत बात है क्या ?
    मैं जाहिर नहीं अपने जज़्बात करूँगा
    जो पसन्द हो तुम्हे बस वही बात करूंगा
    जी करता है कुछ आदतें तुमसे चुरा कर रख लूँ
    अगले ख़त के लिए बाते कुछ बचा कर रख लूँ
    किये गए कुछ वादे तोड़ कर जा रहा हूँ
    मैं ये ख़त तुम्हारे सिरहाने छोड़ कर जा रहा हूँ
    मन की सारे बातें तुम लिफ़ाफ़े पर निकाल रखना
    अच्छा सुनो, चलता हूँ तुम अपना ख़्याल रखना

    © Raj Kishor Singh


    ©rajkssora