• mrig_trishna_ 8w

    Ghazal

    रस्मों वफ़ाए दिल जो तुम्हारा नहीं मिला
    खोया जो प्यार था वो..दुबारा नहीं मिला

    तोड़ा जो दिल को तुमनें...चुभता रहा बड़ा
    मिलने को आये ग़म जो सहारा नहीं मिला

    बहते रहे ख़्याल...........भटकती रही वफ़ा
    उल्फत की कश्तियों को किनारा नहीं मिला

    दिल ज़िंदा कब्र में रखा घुटता रहा मेरा
    इल्ज़ाम ही लगे थे..जनाज़ा नहीं मिला

    रस्मों वफ़ाए दिल जो तुम्हारा नहीं मिला
    खोया जो प्यार था वो..दुबारा नहीं मिला

    मृगतृष्णा
    ©mrig_trishna_