• ramaiyya 63w

    सम्पूर्ण

    भोला भाला उनका चेहरा,
    नयन दंश से डसती हैं,
    बातों का भंडार लिए हैं,
    खिलखिलाकर हँसती हैं।

    चुप-चुप जब वो रहती हैं,
    मन मेरा घबराता है,
    उनका बातूनी होना ही,
    मुझको बड़ा लुभाता है।

    घंटों फोन पर होती बातें,
    वो घंटों बोले जाती हैं,
    मैं चुप चुप सा ही रहता हूं,
    न एहसास कभी कराती हैं।

    वो यूँ तो मेरा नाम न लेते,
    बिन नाम लिए ही बात करें,
    आंख चमकने लगती हैं,
    'रमन' कभी जब मुझे कहें।

    आधे अधूरे काटे सालों,
    अब आ कर के पूर्ण हुआ हूँ,
    इंतजार अब फेरों का है,
    तब लगे सम्पूर्ण हुआ हूँ।


    रमन यादव

    ©ramaiyya