• alkatripathi 16w

    ये कविता मेरे छोटे भाई नितिन ने लिखी है... मुझे इतनी पसंद आई की मैं आप सब से साझा कर रही हूँ

    मैं रूठा,
    तुम भी रुठ गए,
    फिर मनाएगा कौन?

    आज दरार है,
    कल खाई होगी,
    फिर भरेगा कौन?

    मैं चुप,
    तुम भी चुप,
    इस चुप्पी को फिर तोड़ेगा कौन ?

    छोटी बात को लगा लोगे दिल सें,
    तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन?

    दु:खी मैं भी और तुम भी बिछड़कर,
    सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन?

    न मैं राजी,
    न तुम राजी,
    फिर माफ करनें का बड़प्पन दिखाएगा कौन?

    डूब जाएगा यादों में दिल कभी,
    तो फिर धैर्य बंधाएगा कौन?

    एक अहम् मेरे,
    एक तेरे भीतर भी,इस अहम् को फिर हराएगा कौन?

    जिंदगी किसको मिली है सदा के लिए,
    फिर इन लम्हों में अकेला
    रह जाएगा कौन?

    मूंद ली दोनों में से गर किसी ने एक दिन आँखे ....
    तो कल इस बात पर फिर
    पछतायेगा कौन? b

    एक दूसरे का आदर सम्मान करो
    गलतियों नज़रअंदाज़ करो
    अहम को छोड़ दो