• soonam 17w

    जो तेरे जहन से मेरे रुह को
    चूम कर मुस्कुराती है
    तेरे होठों की हंसी से सवेरा होने तक
    उन आंखों की मासूमियत में शामें ढल जाती है
    उन लम्हों को अपने पन्नों में उतारना चाहती हूं..!!

    मैं लिखना चाहती हूं.. हमारे उन पलों के बारे में
    जहां तेरे एक झलक से
    मेरे इस दिल में वो चांद
    जैसे मानों अपनी चांदनी बिखेर देता है
    और तेरे ना होने पर वो अमावस्या में रुखसत हो जाता..!!

    मैं लिखना चाहती हूं.. तेरे
    उस बंधन की गर्माहट को
    उन गीले बिखरे बालों के
    छींटों की नर्माहट को..
    तेरी प्यारी सी मुस्कराहट में
    छुपी तेरी शरारतों को..
    तेरे आंखों के इशारों को
    जो ना कहते हुए भी
    हामी भर जाती है..!!

    मैं लिखना चाहती हूं..
    कि जैसे बिन सांसों के घुटन
    कुछ वैसी लगती है जिंदगी तेरे बिना..
    बिन मोतियों के अधूरी शुक्ति सी लगती है जिंदगी तेरे बिना..
    कि तुम वो दरिया हो.. जहां
    उन किनारों पर ठहर
    पूरी दुनिया खुबसूरत सी लगती है..!!

    हां , मैं लिखना चाहती हूं..
    उस खुदा से दुआओं में
    तुझे मांग कर
    पूरी दुनिया अपनी
    तेरे साथ बसाना चाहती हूं..
    कि तुम वो आसमां हो
    जिसमें खुद को सिमेटना चाहती हूं..
    वो इबादत हो.. जहां
    शिद्दत से हर बार सर झुकाना चाहती हूं..❤️
    ©soonam