• succhiii 44w

    मेरा जीवन
    पतझर कहीं, ,मधुमास कहीं
    उच्छवास कहीं , उल्लास कहीं
    पृथ्वी का गोपन प्यार कहीं
    भू से अम्बर तक ज्वार कहीं
    मेरा जीवन !
    पूजा का पावन फूल कहीं
    सुनसान चिता की धूल कही
    मेरा जीवन !
    ~श्री केदारनाथ मिश्र
    कितनी ख़ूबसूरत पँक्तियां है ना ?
    दो पंक्तियों में जीवन को परिभाषित कर दिया कविवर ने
    अब मेरे शब्दों में जीवन को परिभाषित करती साधारण सी एक आज़ाद कविता , उम्मीद है आप सभी का स्नेह आशीर्वाद मिलेगा
    #abhivyakti09
    @rikt__ Bhai ji
    @bal_ram_Pandey ji

    Read More

    जीवन-रेल

    जीवन, पटरी पर दौड़ती रेल सी
    हर पड़ाव पर रुकती थमती
    आगे बढ़ती , सभी प्रकार के
    मुसाफ़िर, सफ़र में हैं
    बच्चे बूड्डे जवान सभी
    हर पड़ाव पर थमते चलते
    साँस लेते, आगे बढ़ते ,
    रेल रूपी ज़िंदगी अपने
    पूरे वेग में दौड़ रही है
    हर तरह के मौसमों को
    पार करती हुई ,
    कभी सुबह की सुनहरी
    किरणो से नहाकर , तो
    कभी अमावस की काली
    रातो से गुज़रकर , कभी
    बारिशों के घने जंगलो से
    तो कभी सहरा की तपिश से
    गुज़रकर ,कभी शहरो की
    कोलाहल सी, तो कभी गाँव
    की सुकून भरी रातो सी,यूँ ही
    बस गुजरती ही जा रही है
    कभी धूप तो कभी छाँव
    मुसाफ़िर अपने मंज़िलो
    के इंतज़ार में , सफ़र में हैं
    मंज़िलो के आने तक ,
    ज़िंदगी की रेल निरंतर
    दौड़ती चली जा रही है
    हर तरह के मौसमों को
    पार करती हुई !
    @succhiii