• _athazaz 102w

    कल तक जो पूछते थे मेरा हाल तुम
    है हाल कैसा, हो कहाँ आजकल तुम?
    लिख रहा हूँ खुदको मैं, मुझको पढ़ना तुम,
    फिर वहीं, मेरे ख़्वाबों में, आके मिलना तुम।

    किसको पता, हूँ टूटा मैं कितनी दफ़ा,
    है किसको पता, हूँ मैं किस्से ख़फ़ा।
    पर अबके जो मैं बिखरुँगा
    इस बार मैं पक्का रो दूँगा।

    महफिलों में ज़ख्मों पे पर्दा रखूं।
    बुरे हालात में तेरे साथ खड़ा रहूँ,
    मैं बहुत अच्छा हूँ।
    सोचता हूं जीने का ये सलीक़ा छोड़ूं।
    माँ को जो कह देता हूं हर रात
    कि 'माते मैं ठीक हुँ',
    सोचता हूं,
    क्यूँ ना, माँ से तेरी शिकायतें कह दूँ।।

    ©_athazaz(Animesh kumar)