• lafze_aatish 20w

    ज़िन्दगी

    बार बार एक ही गली को ताकता हूँ,
    ज़िन्दगी अब आएगी बस ये सोचता हूँ!

    मेहरम मेरे नियत पर मेरी शक करते है,
    में आईने से जब जब सवालत करता हूँ!

    नि:शब्द

    ©lafze_aatish