• sh_gopal 50w

    सपने अपने

    एक सपना था बच्पन में
    एक रोज में चाँद हो आऊंगा
    इस छोटी सी दुनिया को नाप आऊंगा
    बड़े बड़े अरमान भरे थे बच्पन से
    न जाने वो कैसे दूर हो चले
    या फिर में कभी उनके करीब न हो सखा
    ऐसा असंभव तो था नही
    फिर क्यों सम्भव हुआ नही
    वैसा दिमाग नही था मेरा
    यही वजह थी जो सपना अधूरा हो चला
    एक सपना था बच्पन का
    एक रोज में चाँद हो आऊंगा
    ©sh_gopal