• isolated_atom 22w

    Okay.
    So written in 14.5 minutes.

    Tried hard but didn't catch it.
    But read please.

    Read More

    काश कभी मैं उसकी कविता का शीर्षक बनूं!
    विरक्त होकर भी उसे रक्त से सिंचित करूँ,
    क्षणभंगुर से प्रेम को,अनन्त कर,
    निष्प्राण होकर,समाधि में तैरा करूँ।
    काश कभी मैं उसकी कविता का शीर्षक बनूं!

    उसके वियोग को भास्कर की विभा तले
    रौंद, ध्वंस करूँ,
    रेत से स्नेह प्रमोष कर,उसके ह्रदय को
    कविता रूपी कुसुम से सदैव अलंकृत करूँ ।
    काश कभी मैं उसकी कविता का शीर्षक बनूं!

    व्योम तले स्थाई होकर,
    बेजान पन्नों में सामर्थ्य भरूँ,
    रिस कर अपने अश्रु धरा पर,
    खुद ही मैं सिंचित होकर,
    उसके आंगन में पुष्प खिलूं।
    काश कभी मैं उसकी कविता का शीर्षक बनूं!

    ~सोनल