• kumarrrmanoj 60w

    चल रहे है जब सभी सफ़र में,
    तो हम ही रुके फिर क्यू भला,
    है फासले से अपने अपनों के,
    तो गम करे हम ही क्यू भला,।।1।।

    है दूजो की खातिर जलता दिया,
    अफ़सोस करे हम ही कयु भला,
    उगते सूरज को करते हैं सलाम,
    तो हम ही ढले फिर क्यू भला,।।2।।

    है खामोशियों के इस शहर में,
    आवाज कोई तो कर रहा,
    मौत के फिर किसी खौफ से,
    मुंह बन्द रखे हम ही क्यू भला,।।3।।

    लेकर तमन्ना सरफ़रोशी की सीने में,
    कोई भगत तो सुली चड रहा,
    फिर कातिलों के इस शहर में,
    डरे मरने से हम ही क्यू भला,।।4।।
    ©kumarrrmanoj