• anshuman_mishra 10w

    जाने क्या लिखते हैं कभी-कभी..
    1222 1222 1222 1222
    रकीब - प्रेमिका का दूसरा प्रेमी

    Read More

    बाकी है..

    तवायफ-से बाज़ारों में बिके, जज़्बात बाकी हैं,
    मिली थी झूठ की शक्लों में वो, खैरात बाकी है,
    रकीबों का बुलावा है, बख़ूबी जा'नते हैं हम,
    सहर होगी, चले जाना.. अभी तो रा'त बाकी है..

    _अंशुमान___