poem_writer_

my words knows me better than everyone!!!

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  • poem_writer_ 6w

    वो

    तुम्हारी हर वो बाते ,
    अब मुझे सुकून देती है,
    जो कभी औरों को हम कहा करते थे,
    वक्त वक्त की बात है
    अब हर वक्त खास है,
    जिसमे तुम हो ,
    हर वो पल खास है,

    कैसे बताए हम उन्हें ,
    कैसे बताए हम उन्हें,
    की हम खुद नही जानते,
    की कितना चाहने लगे है हम,

    क्या करे वो इतने प्यारे जो है,
    उन्हें तो हर कोई चाहेगा,
    फिर हम कैसे छोड़ दे उन्हें चाहना,


    कितनी अजीब बात है ,
    उन्हें हम चाहते है ,
    पर उन्हें कोई खबर ही नही,
    हमारे हाल ए दिल की,

    वो तो ऐसे है,
    जैसे उनकी बातो में भी ,
    कुछ बात हो ,
    पर वो कुछ खास है

    To be continued................
    ©poem_writer_

  • poem_writer_ 9w

    कैसे बयां करूं हाल ए दिल ,
    जो दिल में चल रहा ,
    ना जाने क्यों आज ,
    इतनी बेचैनी है ,
    बस दर्द सा महसूस हो रहा,
    ना जाने कैसा ये दर्द है,
    जो न दिख रहा और,
    ना ही सुनाई दे रहा है,

    समय का हाल भी ,
    कुछ तो मैसम बदल रहा है,
    फिर भी दर्द कम नहीं हो रहा है,
    ना जाने क्यों आज,
    ऐसा लग रहा है जैसे ,
    किसी ने खंजर छोड़ दिया है,

    हसने की आदत कुछ यूं हुई,
    की खुद की तकलीफ ही नहीं समझ आती ,
    और ऐसे ही जिंदगी गुजार जायेगी
    ©poem_writer_

  • poem_writer_ 9w

    बहुत तकलीफ है आज
    इस दिल में ना जाने क्यों
    कुछ बेबसी सी है
    दिन हर रोज की तरह ही होगा और ढलता है
    लेकिन ना उम्मीद सी है जिंदगी
    तकलीफ तो बहुत है
    देखने में तो सब अपने है
    अपना कहने वाला कोई नहीं है
    आज जिंदगी बहुत खाली-खाली सी है
    आज ना जाने क्यों दर्द बहुत है
    सपने की तरह सब धुंधला सा है
    जो कल तक साथ थे
    उन्हीं से हम दूर हुए हैं
    ना जाने क्यों आज जिंदगी में खालीपन है
    कहने को तो सब अपनी है
    पर यहां है कौन अपना
    काश कि जिंदगी यही रुक जाए
    और दिल यहीं थम जाए
    सांसे रुक-रुक सी है
    ख्वाब टूटे से हैं
    जिन्हें पूरा करना शायद
    अब मेरे इख्तियार में ना है
    सोचा तो हमने भी बहुत कुछ था
    ना जाने क्यों जिंदगी ने हमें कुछ
    यू रास्ते दिखाएं जो हम खुद ही भूल गए खुद
    रास्ता सोचा था मैंने भी
    ना जाने क्यों भटक गए
    अंधेरे ख्वाबों में
    साथ कोई है या नहीं
    यह तो पता नहीं
    काश कोई अपना होता
    काश कोई अपना होता
    ©poem_writer_

  • poem_writer_ 9w

    आज भी कुछ नही बदला,
    और न कल बदला था,
    पर क्या आने वाला कल बदलेगा,

    हम सब अपनी खुशी के लिए,
    कितना कुछ छोड़ देते है,
    क्या कभी ये किसीने सोचा ,

    ना जाने हम लोग ,
    कितना आगे निकल जा रहे,
    जो अपना कल बनाने की चाह में,
    वो अपना आज भूले जा रहे है,

    समय कभी रुकता नही,
    लेकिन क्या हम खुद थका हुवा महसूस नहीं कर रहे,
    आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में,
    हमारे अपने कहां है,
    ये कौन जानता है,

    खैर यहां लोग अपनो को ही गिराने में लगे है,
    तो कौन अपनो की याद करता है,
    कल हमे जो भी मिले,
    आज हम स्वयं जिम्मेदार है,

    जाने कितने समय बीत गए होंगे,
    आमने सामने बैठे
    यही समय है,
    यही परिवर्तन है,
    लेकिन बहुत बुरा है ।।।।
    ©poem_writer_

  • poem_writer_ 9w

    कितनी राते हमने ,
    बिना खाए,
    गुजारी है,
    क्या कभी किसीने पूछा ,

    कितनी राते हमने,
    बिना सोए,
    गुजारी है,
    क्या कभी किसीने पूछा,

    कितनी राते हमने,
    बिना हंसे,
    गुजारी है,
    क्या कभी किसीने पूछा,

    कितनी राते हमने,
    बिना उनके ,
    गुजारी है,
    क्या कभी किसीने पूछा,

    कितनी राते हमने ,
    बिना हवा,
    गुजारी है,
    क्या कभी किसीने पूछा,

    फिर आज क्यों,
    मैं किसी को जवाब दो ,

    क्यों वो आज ,
    मेरी हर आदत पे,
    सवाल उठा रहे,
    जब कल मैंने ,
    साथ मांगा था ,
    तब किसी ने नही दिया,
    फिर आज क्यों,
    क्यों
    ??????????
    ©poem_writer_

  • poem_writer_ 13w

    Ab दूरियां होगायी है,
    तेरे और मेरे बीच मे,
    इसकी वजह मैं हूं,
    या तुम,

  • poem_writer_ 13w

    ना जाने कभी ऐसा क्यों लगता है,
    जैसे हम तुझे जानते ही नहीं,
    कभी कभी तेरी बाते ,
    दिल को सुकून देती है,
    और कभी कभी ,
    दिल को उलझा देती है ,

    ना जाने कब से इस दिल में ,
    किसी और को जगह दिए बैठे है,
    ना जाने कब किसी और को
    अपनी आदत बनाए बैठे है,
    नाराजगी होते हुए भी,
    बाते करना चाहता है ये दिल,
    ना जाने कब से आंसू
    छुपाए बैठे है ,


    देखते दिन बीत जाता है ,
    गुस्से में,
    पर शाम ढलते ढलते,
    तुझे याद किए बैठे है,
    हर उस लम्हे को
    सोचती हूं,
    जिस लम्हे में तू साथ होता है,
    पर कहने से डरती हूं,
    कही तो दूर न हो जाए ,
    इसलिए दिल का हाल ,
    दिल में ही छुपाए बैठे है।।।
    ©poem_writer_

  • poem_writer_ 28w

    मैं जलती तो रोज हो,
    बुझती भी रोज हो
    पर उस दीपक की तरह नहीं,
    जो एक लव में जल रहा,
    साथ चलने का प्रकाश दे रहा है
    ©poem_writer_

  • poem_writer_ 28w

    मोहब्बत में उन्होंने हमसे पूछ ही लिया,
    की हम उनके क्या है
    हमने भी मुसकुरा कर कहा,
    वही है जो वो समझते हैं,
    ©poem_writer_

  • poem_writer_ 30w

    खुशियों का मंजर होगा,
    होंगे हम और तुम साथ,
    तभी होली होगी,
    जब तुम मुझे यू,
    रंगों से छुओगे,
    तभी तो हमारी होली होगी,

    अबीर गुलाल रंग सब हैं,
    बस तुम्हारी ही कमी है,
    तुम हो मगर ख्वाबों में,
    पर मेरी किस्मत में नही,

    अजीब बात किसी को ,
    चाहने में जिंदगी गुज़र जाती है,
    और मोहब्बत का एहसास भी nhi होता,
    सामने हर ख्वाब है,
    मगर पूरा हो ऐसी कोई ख्वाइश नहीं

    तुम साथ होगे तभी,
    हमारी होली होगी,
    जब टकराएंगे मैं और तुम,
    तभी तो हम होंगे,
    तभी हमारी होली होगी।
    ©poem_writer_