piyushalbus

Seeker, Not Believer.

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  • piyushalbus 8w

    महरुमीयत- feeling of deprivation.
    बे-असर- unaffected.
    दरख़्त- trees
    फ़िराक़- separation

    #falling_flowers #burden #hindiwriters @miraquill
    @hindiurduwriters @hindiwriters @rekhta_

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    बोझ

    गिर जाते हैं जो हो जाते हैं फूल, बोझ शाखों पर,
    और दरख़्त इस महरुमीयत से रहते हैं बे-असर?
    कहो क्यों नहीं मरते दरख़्त वैसे ही फ़िराक़ में ?
    जैसे मर जाते हैं 'नफ़्र', फूल डालियों से टूट कर।

    ©piyushalbus

  • piyushalbus 30w

    मुन्कशिफ़- ज़ाहिर, revealed, disclosed, naked.
    रुसवाई- बदनामी, dishonour
    आशनाई-प्यार, love
    #rachanaprati31 #tera_sath #true_love_is_unconditional #no_judgements
    @vi_shine0202 @anusugandh @bhaijaan_goldenwriteszakir @meri_ankahi_rachanayen @mamtapoet

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    तेरा साथ

    है इश्क़,जो तेरे आगे मुन्कशिफ़ होने से रुसवाई नहीं होती,
    ये तो ज़ाहिर ही है कि महज़ बयानों से आशनाई नहीं होती।
    ढूंढते हैं हम अपनों के दरमियां भी 'तेरे साथ' की हिफ़ाज़त,
    कौन कहता है 'नफ़्र' कि अपनों के बीच तन्हाई नहीं होती।

    ©piyushalbus

  • piyushalbus 31w

    तवक़ूफ़- ठहराव, pause, a moment of indecision.
    #hindiwriters #hindinama @hindiwriters @hindinama @rekhta_

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    तवक़ूफ़

    उन्हें तूफानों ने ही तो संभाला है 'नफ़्र' उम्र भर,
    बिखरकर रोएंगे तो ये साथ भी कहीं छूट जाएगा।
    उन्हें मंज़ूर नहीं है अब कहीं इक पल भी ठहरना ,
    उन्हें डर है कि तवक़ूफ़ में कुछ टूट जाएगा।

    ©piyushalbus

  • piyushalbus 31w

    आज़ाद सोच, पर कैसे?

    बिन इख्तियार मैं बात समझ पाऊँ भी तो कैसे?
    बिन गंगा में उतरे मैं तर जाऊँ भी तो कैसे?
    इस कदर पाबंदी है इतिल्ला-ए-जुल्म पर तेरी
    ये बता सुरते हाल तुझे बतलाऊँ भी तो कैसे ?

    एक अरसे से कौमी ज़हन पर ताले पड़े हैं ,
    आज़ाद सोच पर पड़े जाले मैं हटाऊँ भी तो कैसे ?
    खोखली बुनियाद है ईमान की इस सरज़मीं पे,
    अमनों चैन का मुल्क यहाँ बसाऊं भी तो कैसे ?

    मातम हो जहाँ भूखे बच्चों के रोज़ मरने का,
    उस मुल्क की कामयाबियों पे मुस्कुराऊँ भी तो कैसे?
    मेरे आईने में आँखे झुका भारत खड़ा है 'नफ़्र',
    उसकी झुकी नजरों से नजरें मिलाऊँ भी तो कैसे?

    ©piyushalbus

  • piyushalbus 31w

    #rachanaprati28

    सर्वप्रथम मैं फिर एक बार @mamtapoet जी को धन्यवाद कहना चाहूंगा जिन्होंने मुझे #rachanaprati28 के संचालन का कार्यभार सौंपा ।
    'एक पैग़ाम क्रांतिकारियों के नाम' विषय पर सभी ने उत्कृष्ट विचार प्रस्तुत किए। सभी की रचनाएं एक से बढ़ कर एक थी। देशप्रेम का जो भाव मैंने सभी रचनाओं में पढ़ा, मन को बेहद तस्सली हुई। किसी ने देश के इतिहास को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया तो किसी ने देश की मौजूदा चुनौतियों को प्रबल रूप से उजागर किया। सभी कलमकारों को मेरा साधुवाद और शुभकामनाएं।
    मेरी तरफ से आप सभी विजेता हैं ।

    #rachanaprati29 को आगे ले जाने की जिम्मेदारी मैं @harpee420 को सौंपता हूँ जिन्होंने दो अप्रतिम रचनाएं प्रस्तुत की। आशा करता हूं आप सबका समर्थन उन्हें मिलेगा ।

    मुझसे संचालन में कोई त्रुटि रह गई हो तो क्षमाप्रार्थी हूँ।
    सभी को धन्यवाद एवं शुभकामनाएं।
    जय हिंद।
    ©piyushalbus

  • piyushalbus 31w

    सर्वप्रथम मैं @mamtapoet ji को सफल संचालन की बधाई देना चाहता हूँ, और एक अप्रतिम और सुंदर विषय चयन के लिए उनको धन्यवाद कहना चाहता हूँ। उन्होंने रचनाप्रति की इस श्रृंखला को आगे बढ़ाने के लिए मेरा चयन किया इसके लिए मैं उनका आभारी हूँ।

    आप सब जानते हैं कि आने वाले वर्ष 2022 में भारत अपनी आज़ादी की 75th वर्षगांठ मनाने जा रहा है, इसी उपलक्ष में मैंने अगले विषय का चुनाव किया है।

    #rachanaprati28 के लिए विषय है "एक पैग़ाम क्रांतिकारियों के नाम"।

    इस विषय पर आप अपने किसी भी एक प्रिय क्रांतिकारी का चुनाव करें और उन्हें कविता स्वरूप एक पत्र लिखें, जिसमे भारत की मौजूदा उपलब्धियों अथवा चुनौतियों का वर्णन हो। आप इस पैगाम में अपनी स्वतंत्रता की कल्पना भी उनसे साझा कर सकते हैं।
    आप अपनी रचनाएं 20 june रात 8 बजे तक जरूर पोस्ट कर दे।

    आशा करता हूं कि आप सब को विषय पसन्द आया होगा और आप सब रचनाप्रति में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेंगे।
    आभार सहित,
    पीयूष

    @anusugandh @bhaijaan_goldenwriteszakir
    @aka_ra_143 @chahat_samrat

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    #rachanaprati28

    सूर्य अस्त हो चला है तमस के समंदर में, फिर भी
    क्षितिज पर नूर-ए-आफताब अभी बाकी है।
    आज़ाद सोच दफ़्न है ज़िंदा लाशों में कब से,
    भगत, लौट आओ, इंक़लाब अभी बाकी है ।

    भस्म हो गया है साम्राज्यवाद का रावण, लेकिन
    पूंजीवादी शोषण के मेघनाद का अंजाम अभी बाकी है।
    साम्प्रदायिक उन्माद के पिंजरे में कैद है जो,
    उस सोने की चिड़िया का कोहराम अभी बाकी है।

    जन्मभूमि की जंग में मदहोश रहे सब पर देखो,
    भुख और गरीबी के खिलाफ एक अभियान अभी बाकी है।
    कोशिशें बहुत हुई गांधीजी के तरीको से, भगत लगता है,
    बिस्मिल और आज़ाद का वो सर्वोच्च बलिदान अभी बाकी है ।

    जय हिंद के नारे अब कहीं सुनाई नही देते ,
    अल्लाह और राम के बीच फँसा इंसान अभी बाकी है।
    हे भगत, हो सके तो सबको साथ लेकर आओ,
    सैकड़ो जख्मो की पीड़ा से चीखता हिंदुस्तान अभी बाकी है।

  • piyushalbus 31w

    लबों से

    तमन्ना है की छू लें सच्चे इश्क़ को लबों से 'नफ़्र',
    चलो फिर इक बार वतन की मिट्टी को चूमा जाए।

    ©piyushalbus

  • piyushalbus 32w

    बेवजह मौत

    कोई मौत बेवजह नहीं होती, न होगी कभी भी 'नफ़्र',
    दिखते नहीं लपटों में मगर, सब दिल जला करतें हैं ।

    ©piyushalbus

  • piyushalbus 33w

    सपनें

    बच्चों की परवरिश और अपने सपनों के बीच,
    अब भी उसका ये संघर्ष जारी है,
    यहाँ माँ होना कठिन तो है 'नफ़्र',
    माँ होकर सपने देखना उससे भी भारी है।

    ©piyushalbus

  • piyushalbus 33w

    आशना- friend, companion.
    अफसाना- story.
    शहरयार- friend of the city, king.
    #friendship #love #loneliness #alone_in_a_crowd
    @hindiwriters @rekhta_ @hindinama @readwriteunite

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    शहरयार

    आशनाओं के अफसानों में अपना किरदार तलाशता है,
    वो शहरयार है 'नफ़्र', मगर शहर भर में यार तलाशता है।

    ©piyushalbus