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Reposts
  • parth_101 83w

    क्या जो कहें
    कि तुम-से इश्क़ है
    या न कहें
    कि तुम्हीं इश्क़ हो

    क्या जो कहें
    क्या पा लिया
    या न कहें
    क्या छुपा लिया

    ©पार्थ

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    .

  • parth_101 83w

    तेरे हर अंदाज वो दोहराया करता था
    जो काँप रहा है आज तालियाँ बजाने में
    कैसे कहे, कि डर लगता है
    वो आखिरी किरदार दोहराने में

    Sir..
    आखिरी किरदार से खफा है कोई

    #lost_star
    #bollywood��

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    (क्यूँ?)

    Umra chhin gayi
    Ke tumse kya kahu
    Pal bhar na diya manane ko
    Ek sawaal chhodkar piche kahi
    Aaye hi nahi wapis batane ko

  • parth_101 86w

    मुझे नहीं पता इंतज़ार करना किसे पसंद है
    पर तुम पसंद हो, मुझे ये बात पसंद है

    ©पार्थ

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    परों को खोल, ज़माना उड़ान देखता है
    जमीं पे बैठके, क्या असमान देखता है

    ©Not_me

  • parth_101 87w

    काग़ज़ की कश्ती में नाम क्या लिखा तेरा
    यार तुम तो डूबी ही, मेरी यादें भी ले डूबी

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    ओझल होती किरणों जैसी, मिलना मुझको शाम बनकर
    नूतन कोरे काग़ज़ की तरह, फ़िर एक पुराना नाम बनकर

    ©parth_101

  • parth_101 87w

    ढल गया तेरे हुस्न का नशा अगर,
    मेरी जाँ,
    प्यार की उमर न ढल जाए ��‍♂️

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    उन आशिकों से क्या कहूँ, कि हुस्न पे मरने वाले हज़ार हैं
    वो जो सादगी पे मरा ,  ले गया दिल , बाक़ी सब बेकार हैं

    ©parth_101

  • parth_101 88w

    वो केहती है जरूरतों से ज्यादा तुम उसके होके रेहना, जिसका रंग भी मेरे रंग से मिलता है... जैसे आँखें तुम्हारी ��

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    गहरी होगी, जो तेरी आंखें इस क़दर
    तो कैसे मैं, नज़रों में डूबकर लिखूँगा

    तुम आँखों से दिखाना खुदको मुझे
    मैं फ़िरसे वो तस्वीर तुझको लिखूँगा

    ©पार्थ

  • parth_101 88w

    तुम-सा एक, कोई नहीं
    बस हर फरेब
    कम-से-कम
    तुमसे कम लगता है

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    ख्वाब
    तेरा भी तो था
    अच्छा छोड़
    था या हूँ, ये तो बता

    ©पार्थ

  • parth_101 88w

    बेबाक लिखना मुझको, ग़र हो, कोई भी खता
    मैं याद ही नहीं तो, लिखेगा क्या, ये बता?

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    जज़्बाती हैं लोग यहाँ
    ग़र पूछो, लिखते क्या हो
    कहते हैं......"तुमको"

    ©पार्थ

  • parth_101 88w

    @fairygurl aapke second last post ka Collaboration samajh lijiye. Bohot achha likha tha aapne��

    भूली बिसरी सी
    ज़हर या मिश्री सी
    यादें तो यादें होती हैं
    कुछ भूल जाने को
    कुछ ठहर जाने को

    अटक रही यादों में जो तेरी बन्दगी है
    पुराने जख्मों से ही, साँस लेती ज़िन्दगी है

    कुछ वक़्त को, गुज़र जाने दो
    फ़िर समय दो रूठने मनाने को
    जिस पर ज़ोर नहीं चलता
    वो यादें तो यादें होती हैं
    कुछ भूल जाने को
    कुछ ठहर जाने को..!!

    ©parth_101

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    भूली-बिसरी यादें

    वो भी क्या दिन हुआ करते थे..!!

    दिन उजालों में
    बीते सालों में

    छूट रहा हर पल हो जैसे
    डूबता ख़ुदमें दलदल हो जैसे

    आँखों की ढलती खूबसूरत शाम को
    यूँ नज़रों के जाम से भरा करते थे,
    न जाने, कितनों के दिल मरे मुझपे
    हम तो बस, तुमपे मरा करते थे

    वो भी क्या दिन हुआ करते थे..!!

    दिन-ब-दिन चलती, शाम ढलती
    रात की सुबह भी तो, तुम्ही से थी
    अधखुली आँखों से
    अंत की शुरुआत भी तो
    कल तक, तुम्ही से थी

    दूर जाता तुझको देख
    नज़रों से ही, तेरे अक्स को
    अक्सर अश्क से छुआ करते थे

    वो भी क्या दिन हुआ करते थे
    वो भी क्या दिन हुआ करते थे..!!

    ©parth_101

  • parth_101 88w

    सिरहाने में अब वो नींद कहाँ
    जो सर रखकर तेरी गोद में है

    A dialogue from KGF
    "सबसे बड़ी योद्धा माँ होती है"��

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    एक तुम ही हो
    जो बदली नहीं
    ना धूप में,
    ना छाँव में
    बदलती फिज़ा में,
    ना बरसात में !!

    तुम्ही मेरे पहले निवाले की याद हो
    माथे को स्पर्श करता आशीर्वाद हो

    तिलमिलाती भूख हो,
    या ठिठुरता बदन तेरा
    ठंड में मुझको लिपट रही कम्बल
    और हाथों का
    दस्ताना भी तुम,
    तो कहीं गोद बनी, सुकून का
    सिरहाना भी तुम !!

    ..माँ..
    जो भी हो पहर

    एक तुम ही हो
    जो बदली नहीं
    ना धूप में,
    ना छाँव में
    बदलती फिज़ा में
    ना बरसात में !!

    ©पार्थ