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  • pariyadav 21w

    स्त्री

    कितना मुश्किल लगता है एक स्त्री होकर जीना
    हर बात पे लोगों के ताने और बड़ों की इज़्ज़त के नाम पर अपमान का वो घुट पीना
    किचन में काम करते समय गैस की आँच से आया हुआ वो पसीना
    फिर कपड़ो की सफाई करने से नाज़ुक से हाथों में आया हुआ वो छालों का नगीना
    कितना मुश्किल लगता है एक स्त्री होकर जीना

    डिग्री हो हाथों में तो वर्किंग वुमन घर क्या संभालेगी का टैग लेकर जीना
    और डिग्री ना हो तो अनपढ़ और नकमायाबी का बोझ लेकर जीना
    इन दोनों ही हालातो में इस समाज की माँग है हर लड़की में हो खुबसुरती और सर्वगुण संपन्न होने का नगीना
    कितना मुश्किल लगता है एक स्त्री होकर जीना

    उम्मीदें कुछ अपने बेटो से भी रखोना
    हाथ बटाए अपनी माँ, बहन और पत्नी का ये सिख उसे भी तो दोना
    थककर जब पत्नी काम से आये तो कभी पानी का ग्लास उसे भी तो दोना
    कितना मुश्किल होता है एक स्त्री होकर जीना।

  • pariyadav 38w

    Time Blocking

    1. 5AM to 5.30Am:- Exercise
    2. 5.30 to 6Am:- Meditation
    3. 6Am to 6.30:- Book
    Reading
    4. 7Am to 1PM:- House Hold
    Work
    5. 1PM to 3PM:- My Book
    Writing
    6. 3PM to 5PM:- YouTube
    Content
    Writing and
    Recording
    7. 5PM to 6PM:- Ayurvatika
    Business
    Planning
    8. 6PM to 9PM:- House Hold
    Work
    9. 9PM to 9.30PM:- Dinner
    10. 9.30PM to 10PM:- Book
    Reading
    and Self
    Learning.

  • pariyadav 48w

    #fun

    अमीरों के बच्चे डाट पड़ने पर नाराज होकर अपने कमरे चले जाते है
    मिडल क्लास फैमिली के बच्चों की पिटाई होने के बाद भी मज़ाल है वो दरवाजे तक भी जाए क्योंकि बाहर जाने की कोशिश की तो माँ फिर से पिटेगी और नाराज होकर वो बेचारा 10×10 के घर मे जायेगा कहाँ।
    ©pariyadav

  • pariyadav 48w

    #khamoshi

    कभी- कभी लोगों की खामोशी भी बहुत कुछ कहती है
    लेकिन उसे सुनने के लिए कानों की नहीं ज़ज़्बातों की जरूरत होती है
    ©pariyadav

  • pariyadav 48w

    दोस्त

    जिनके लोगों के बहुत कम दोस्त है
    वो लोग बहुत खुशनसीब होते है
    क्योंकि भीड़ तो पैसों से जमा की जाती है
    ©pariyadav

  • pariyadav 49w

    Short story माँ

    कलाकार:-जन्म से अंधा एक कलाकार मूर्ति बना रहा था तो किसी मुसाफिर ने पूछा?
    मुसाफिर:-जिसे तुमने तराशा है ये है कौन ? बहुत ही सुंदर है।
    कलाकार:-कलाकार ने मुस्कुराते हुए कहा मेरी माँ है।
    मुसाफिर:- तुम तो अंधे हो तो बिना अपनी माँ को देखे उनकी मूर्ति कैसे बना सकते हो?
    कलाकार:- आपने हवा को देखा है कभी?
    मुसाफिर:- नही लेकिन उसे महसूस किया जा सकता है।
    कलाकार:- जी ठीक कहा उसी तरह माँ भी एक खूबसूरत एहसास है जिसे महसूस किया जा सकता है।
    ©pariyadav

  • pariyadav 49w

    सपने

    सपनों को सच बनाना काबिलियत होती है
    और काबिलियत को कामयाबी बनाना जुनूनियत
    ©pariyadav

  • pariyadav 49w

    माँ -2

    खुदा ने जमीं पे फरिश्ता उतारा है
    सारे जहां मे उसकी खुशियों का नजारा है
    अगर कोई पूछे मुझसे की कैसा दिखता है खुदा
    माँ लबो पे बस नाम आता तुम्हारा है
    ©pariyadav

  • pariyadav 49w

    माँ

    उसने अपने आँचल मे सारा संसार समेटा है
    जलती धूप मे भी जो शीतल छाया देता है
    छप्पन भोग भी उसके हाथों के बिना फिके लगते है
    उसकी बनाई सूखि रोटी भी पिज्जा बर्गर का स्वाद भुला देते है
    चोट जो बच्चो को लग जाए तो सासे उसकी थमती है
    आँखों मे नीर हमारे हो पर पीर उसके दिल मे उठती है
    जन्म लेने से मरने तक जिसने सिर्फ हमारा सुख-दुख सोचा है
    ऐसी माँ की सेवा मे हमारा जीवन बहुत छोटा है
    धरती, गंगा, जननी, सीता या भारत माता
    जो चाहे इन्हें पुकारो इनके रूप अनेक है
    ©pariyadav

  • pariyadav 49w

    कब तक सोयेगा
    इस कीमती समय को तु कब तक खोयेगा
    जिंदगी के इम्तिहान को यू ना आजमा
    क्योंकि वक़्त ने आजमाया तो तु बहुत रोयेगा
    ©pariyadav