pain_addicted

Shiv Sama Rahe Mujhme Aur Main Shunya Ho Raha Hoon

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Reposts
  • pain_addicted 1w



    कहानियाँ तो बेशक...,
    ईश्वर ने लिखी हो...,

    किरदारों का चयन...,
    हमें स्वयं ही करना होता...!


    pain_addicted

  • pain_addicted 1w

    लागत क्या है??
    बता मेरे अपनों की खुशियों का...!

    तू गर कबूल कर ले तो...,
    रूह भी गिरवी रख जाऊँ...!


    pain_addicted

  • pain_addicted 5w

    बहुत सताया करती है...,
    वो रातें...,
    जहाँ आँखों कों...,
    तेरे काँधे की आलिंगन नसीब होती थी...!



    ©pain_addicted

  • pain_addicted 7w

    मिले हो तुम...,
    काफी जतन से...!

    तुमसे इश्क़ ना हो...,
    ये मुमकिन तो नहीं...!


    ©pain_addicted

  • pain_addicted 7w

    ��आदि गुरु शंकराचार्य��
    शिव साधना

    #rachnaprati72

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    शिवोहम

    मैं न तो मन हूं, न बुद्धि, न अहंकार, न ही चित्त हूं
    मैं न तो कान हूं, न जीभ, न नासिका, न ही नेत्र हूं
    मैं न तो आकाश हूं, न धरती, न अग्नि, न ही वायु हूं
    मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

    मैं न प्राण हूं,  न ही पंच वायु हूं
    मैं न सात धातु हूं,
    और न ही पांच कोश हूं
    मैं न वाणी हूं, न हाथ हूं, न पैर, न ही उत्‍सर्जन की इन्द्रियां हूं
    मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

    न मुझे घृणा है, न लगाव है, न मुझे लोभ है,
    और न मोह न मुझे अभिमान है, न ईर्ष्या
    मैं धर्म, धन, काम एवं मोक्ष से परे हूं
    मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

    मैं पुण्य, पाप, सुख और दुख से विलग हूं
    मैं न मंत्र हूं, न तीर्थ, न ज्ञान, न ही यज्ञ
    न मैं भोगने की वस्‍तु हूं, न ही भोग का अनुभव,
    और न ही भोक्ता हूं
    मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

    न मुझे मृत्यु का डर है, न जाति का भेदभाव
    मेरा न कोई पिता है, न माता, न ही मैं कभी जन्मा था
    मेरा न कोई भाई है, न मित्र, न गुरू, न शिष्य,
    मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

  • pain_addicted 7w



    जात-पात सब व्यर्थ का...,
    तू क्यों मानव इतराये...,
    कर्म नहीं तेरे धर्म का...,
    पाप ही कर खुश होये...,

    राम-रहीम सब चले गए...,
    देकर शिक्षा जन-कल्याण का...,
    तू क्यों मानव घमंड करे...,
    दमन हुआ रावण के भी अहंकार का...,

    स्त्री को अबला सब कहे...,
    प्रथा ऐसी सभ्य समाज का...,
    जो जननी है सृष्टि की...,
    वो सदा ही लज्जित होये...!



    ©pain_addicted

  • pain_addicted 7w

    गुजरो जो कभी तुम मेरे वक़्त में...,
    हर पेहर खुद कों ही व्याप्त पाओगे...!



    ©pain_addicted

  • pain_addicted 7w

    तेरी सलामती का...,
    मै दे दूँ कोई भी हर्जाना...,

    खुदा गर मांगे तो...,
    मै जान भी अपनी दे जाना...!


    ©pain_addicted

  • pain_addicted 7w

    एक पल भी रेह ना पाऊं...,
    तुम बिन साँसे ही रुक जाना...!

    जो तू ना मेरा हो...,
    मै ना किसी का होना...!


    ©pain_addicted

  • pain_addicted 7w

    काफी अरसे बाद...,
    मिला हूँ खुद से....!

    जिसमे सिर्फ तुम...,
    बस तुम मिला करते हो...!


    ©pain_addicted