nitinraj

A student of engineering इश्क़-ए-बिहार

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  • nitinraj 16w

    जब सोने की चिड़िया ने अपना पंख फड़फड़ाया
    अंग्रेजी पिंजड़े टूट गए और आसमान में तिरंगा लहराया

    जब जुल्म बढ़ गए हद से ज्यादा, वीरों ने ऐसा जुनून दिखाया
    निचोड़कर अपने रगों से खून सीतमगर को लहू की नदी में डुबाया

    याद करो संघर्ष वो भगत सिंह और गांधी की
    मर के भी जो अमर रहा उस चंद्रशेखर के आजादी की

    गोरों के दिल दहलाने वाली
    आजादी की बिगुल बजाने वाली
    खून की प्यासी वो तलवार झांसी की रानी वाली

    गोडसे की टोली देशभक्त हो रहें हैं
    लगता है बाग -ए -चमन की खुशबू खो रहे हैं

    हमारी संकृति हमे जंजीर लगने लगे है
    गांधी जी बस दीवार पर टंगी तस्वीर बन के रह गए हैं

    देकर दान में सांसें किसी ने पाई आजादी
    खेल रहा है खेल सियासत धर्म धर्म और जाति जाति

    बेच कर भविष्य युवा की पेट भर रहे व्यापारी की
    समझ रहे हैं बखूबी तुम्हारी अगली चाल है किसानी

    कभी सोचा है हमने कब सिख लिया किसी को दुश्मन की नजरों से देखना
    हमने तो वसुधैव कुटुंबकम् सीखा था

    हमने कब सीखा ये बेटा और बेटियों का फर्क हमने तो स्त्रियों के लिए रामायण और महाभारत देखा था

    कब सीखा ये धर्म और जातियों का फर्क
    हमने तो विभिन्नता में एकता देखा था

    आजादी की हार्दिक शुभकामनाएं
    ©nitinraj

  • nitinraj 55w

    ममता की छाव में तुम भी पले हो
    लेकिन बचपन अपनी खेल में गवां कैसे सकते हो।।
    लड़के हो तुम जिम्मेदारियों के बोझ तले दबाए जा सकते हो।।

    उम्र मायने नहीं रखती तुम्हारे लिए
    तुम दूसरों की जरूरतों के लिए अपनी खुशी की मार सकते हो।।
    लड़के हो तुम बचपन से ही पिता के नक्श- ए- कदम पर दौड़ाए जा सकते हो।।

    चोट लगी है , कोई बात नहीं
    ज़ख्म को अंदर ही छुपाए रख सकते हो।।
    लड़के हो तुम दर्द को मुस्कुराहटों से मार सकते हो।।

    माना जिम्मेदारियां बहुत है तुम्हारे ऊपर
    लेकिन दिखाकर खुद को बेफिक्र तुम औरों को हंसा सकते हो।।
    उंगलियां तो अपने भी उठाएंगे तुम पर,
    लड़के हो तुम आंसू कैसे बहा सकते हो।।

    होता है अगर कोई मुद्दा मायने नहीं रखता सही या ग़लत
    बस सारी जिम्मेवारी तुम्हारी है
    लड़के हो तुम दूसरों को दोषी ठहरा कैसे सकते हो।।@likhahuakuch_14 @mai_shayar_to_nahi_ @poetryoofmyhearts @mirakeeworld @manuu_

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    Happy Men's Day

  • nitinraj 55w

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  • nitinraj 56w

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  • nitinraj 65w

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    ©nitinraj

  • nitinraj 69w

    रात के मयखाने में जिंदगी क्या खूब थी।
    अब सूरज उगी तो मौत आनी चाहिए।।

    सारी उम्र बीत गई घुंघरुओं की खनक में
    अब मुश्किलें बढ़ी तो फिर जवानी चाहिए।।

    आधी जीवन निकल गई पल भर की मौज में
    अब आधी के लिए मुट्ठी दबानी चाहिए।।

    जिंदगी को ढूंढने चौराह पर खड़े हो जब
    खुद को सही राह समझानी चाहिए।।

    किस्मतों पर मरते रहे हो अब तलक जो
    मुश्किलें भी कभी आजमानी चाहिए।।
    ©nitinraj

  • nitinraj 82w

    माँ

    खुद दुख सहकर तुमने मुझे सारी खुशियां दी मगर कभी किसी से कुछ कही नहीं।
    नौ महीने तक कोख में रखा मगर कभी तुम थकी नहीं।।

    माँ तुम ही मेरे जीवन की पहली गुरु हो।
    भगवान करे मेरी सारी खुशियां तुमसे ही शुरू हो।।

    हांथ पकड़ कर तुमने मुझे चलना सिखाया ।
    दुनिया के तौर तरीको में ढलना सिखाया।।

    शैतानी करने पर मुझे डांट भी लगाती थी।
    मगर पापा के गुस्सा होने पर अपने आंचल में छुपाती थी।।

    हां मैं अभी तुमसे दूर हूं।
    लेकिन क्या करू माँ मै भी मजबुर हूं।।

    मुझे पता है तुम सोचती हो की मेरा बेटा एक दिन बड़ा आदमी बनेगा।
    वादा रहा माँ तेरा बेटा हर सपना पूरा करेगा।।
    ©nitinraj

  • nitinraj 84w

    कि रो रोकर गुजारू ऐसी कोई रात नहीं है
    आए हर पल आपकी याद ऐसे मेरे अब हालात नहीं है
    आई है इश्क़ समझ आपको बड़े मुद्दतों के बाद
    मगर हम चाहें आपको फिर से
    अजी आपमें अब ऐसी कोई बात नहीं है
    ©nitinraj

  • nitinraj 86w

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  • nitinraj 87w

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