nishabd_anand

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Likhta hu use bhulane ko Jiske liye me tha hi nhi kabhi Instagram: @nishabd_anand

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  • nishabd_anand 8w

    मैं सोचा था तुम समझोगे
    मेरे हर नुख्स हर ऐब को
    मेरे हर दुख हर दर्द को
    फिर कहोगे मुझसे कि मैं हूं तो
    मेरी हर खुशी में शामिल होगे
    मेरे हर दुख का सहारा बनोगे
    ता उम्र मुझे गिरने न दोगे
    और ये सब एक तरफा नहीं सोचा था
    मैं भी मेरी जिंदगी तुम्हे सौप देता
    तुम्हारे हर गम को बांट लेता
    और कहता तुमसे की फ़िक्र न कर मैं हु तो
    पर जो सोचूं मैं वो हो जरूरी तो नहीं
    क्युकी मेरी सोच मैं सिर्फ सुर्ख उजाला
    पर हकीकत तो घुप अंधेरा भी हैं
    तो अब सोच लिया के कुछ न सोचूंगा
    ---- आनंद सगवालिया
    ©nishabd_anand

  • nishabd_anand 9w

    कुरेद दीवारों को नाखून कुतर लिए।
    अब बता भी दे कितना इंतजार बाकी हैं।।

    मेरा इज़हार ए इश्क़ पखवाड़े पहले हुआ।
    अब भी तलब को तेरा प्यार बाकी हैं।।

    तू अब आ भी जा निशा के संग।
    आंखो को तेरा दीदार बाकी हैं।।

    तू सुबह को महका दे तेरी खुशबू से।
    तेरे भीगे बालों की मुझ पर फुहार बाकी हैं।।

    मेरे दिन को तेरे दिन से जोड़ दे।
    मेरे इश्क़ का जुनूनी रुख अख्तियार बाकी हैं।।

    तेरे हाथों को मेरे हाथो में थामने दे।
    तुझ संग चलने को जिंदगी का त्यौहार बाकी हैं।।

    मिलने दे तेरी रूह को मेरी रूह से।
    जन्मों की मोहब्बत का अभी इकरार बाकी हैं।।

    ---- आनंद सगवालिया
    ©nishabd_anand

  • nishabd_anand 13w

    न जान पाओगे गहराई दरिया की
    डूब जाओगे अगर गोते लगाओगे
    चंद ही हुए हैं खुशनसीब जहां में
    जो डूबे भी और पार भी हुए
    ये दरिया समुंदर होता तो बात अलग थी
    ये दिल हैं जितना डूबोगे उतना गहरा
    ---- आनंद सगवालिया
    ©nishabd_anand

  • nishabd_anand 13w

    बेहोश रहने की आदत डाल ली,
    तुम होश में आने नहीं देती हो
    ---- आनंद सगवालिया
    ©nishabd_anand

  • nishabd_anand 17w

    बेगुनाहों का कत्ल करके
    गुनहगारो को माफ करते हो
    इंसानियत ताक में रखते हो
    और कहते इंसाफ करते हो
    ---- आनंद सगवालिया
    ©nishabd_anand

  • nishabd_anand 23w

    ये वक्त बे-वक्त की याद का मजा कीजिए
    महसूस मौजूदगी को उनकी तफसील से कीजिए
    रूठना मनाना रूठ कर मान जाना
    इस इश्क की आदतों में हैं शामिल
    इन आदतों इन चाहतों को मुक्कमल तो कीजिए
    ये दरिया भावनाओ का हैं जरा तैर लीजिए
    पानी के जैसे हर रंग में रंग लीजिए
    रोना रुलाना हंसना हंसाना
    इनके बिना इश्क होता नही हासिल
    इन सब हरकतों में जरा घुल मिल तो लीजिए

    ---- आनंद सगवालिया
    ©nishabd_anand

  • nishabd_anand 28w

    कुछ यूं नाराज से रहते हो हमसे
    इश्क और बढ़ सा जाता हैं तुमसे

    ---- आनंद सगवालिया
    ©nishabd_anand

  • nishabd_anand 30w

    तेरी नाराजगी में, और ज्यादा प्यार रहता हैं।
    तभी तो ये दिल, तेरे लिए बेकरार रहता हैं।।

    ---- आनंद सगवालिया
    ©nishabd_anand

  • nishabd_anand 30w

    लाश को कब्र से उठा दे, तेरा इश्क।
    हम तो फिर जिंदा हैं।।

    -----आनंद सगवालिया
    ©nishabd_anand

  • nishabd_anand 31w

    तुमसे बात करता हूं तो सुकून मिलता हैं।
    चेहरा बेवजह ही मुस्कुरा कर खिलता हैं।।
    अंधेरे को कह दो मैं चांद के साथ हूं।
    हर तरफ उजाला तेरी रोशनी का मिलता हैं।।

    ---- आनंद सगवालिया
    ©nishabd_anand