nikhilkhandelwal

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  • nikhilkhandelwal 71w

    रिहाई

    ©nikhilkhandelwal

    इश्क़ में तेरे सिर्फ रूसवाई मिली
    मैने तुझे इश्क़ में खुदा माना तुझे खुदाई मिलीे
    मेरे हिस्से तोह इश्क़ में आया इलजाम हर दफा
    लानतें तोह खूब मिली पर इश्क़ से तेरे रिहाई न मिली

  • nikhilkhandelwal 83w

    ©nikhilkhandelwal
    मियाद पूरी हो चुकी है कुछ काम अधुरे छोडे जा रहा हु
    मैं अपने जमीनी रिस्ते तोड़कर फिर से मेरे रब का होने जा रहा हु

  • nikhilkhandelwal 87w

    ©nikhilkhandelwal
    अधुरे इश्क़ का क्या अनजाम होता है
    कोई सायर कोई कायर तोह कोई इश्क़ में बदनाम होता है
    दिल तोडने वाले चले जाते हों यूही दिल तोड़ के किसी का
    टूटे हुए आशिकों का मौत से भी बत्तर अंजाम होता है

  • nikhilkhandelwal 87w

    ©nikhilkhandelwal

    तुझे भुलाने की कोशिश हज़ार करी है
    एक दफा नही कई बार करी है
    अब तू ही बता भुलाऊँ कैसे तुझे
    तू दिल्लगी करके मुझे भूल गया
    पर मैन तोह मोहहबत बेपरवाह करी है

  • nikhilkhandelwal 87w

    ©nikhilkhandelwal
    खुदार हु प्यार में और व्यापार में
    दिल का हर जख्म उतारूगा सूत समेत
    तेरे उसी इश्क़ के जूठे से बाजार में

  • nikhilkhandelwal 89w

    ©nikhilkhandelwal
    के सब कुछ थमा थमा सा लगता है
    रूह तलक से हर इंसान जमा हुआ सा लगता है
    के कुछ लोग बात तोह कर रहे है लोगो के इंसानियत की
    पर शायद इनकी इंसानियत का इंसान मरा हुआ सा लगता है
    के रहमत गार अब तोह सब है तेरी रहमत पे टिका हुआ
    खता हुई हमसे के शायद कुछ समय से तू हमसे चिढा सा लगता है

  • nikhilkhandelwal 93w

    ©nikhilkhandelwal
    बदले में भले न दे सके मेरे हिस्से की खुशियां कोई बात नही
    मेरे हिस्से की इज़्ज़त मुझे अता कर देना
    मानता हूं कि जज़्बात बया करने के मामले के थोड़ा कमजोर हु
    हो सके तोह मुझ पे गाहे बहागे मुझपे हक जता देना

  • nikhilkhandelwal 94w

    ©nikhilkhandelwal
    कुछ खास नही अहसास कहता हूं
    शब्दों के सहारे सिर्फ जज्बात कहता हूं
    लोग अंजाम की फिक्र में रहते है में आगाज में रहता हूं
    बोल नही पाता जब अपने होठों से में अपनी कलम से कहता हूं
    जूठी महफ़िलो का शौक नही मैं अपने आप मे ही रहता हूं
    इश्क़ का इज़हार किया नही कभी महबूब से मैन
    मैं एक तरफा आशिक़ हु अपनी ही आशिक़ी के नशे में चूर रहता हूं

  • nikhilkhandelwal 101w

    ©nikhilkhandelwal
    किसी से दिल यू ही न लगा लेना चंद मुलाकातों में
    राज दिल के यू ही न बता देना बातो बातो में
    के लोग बड़े खुदगर्ज है जनाब फायदा उठा लेंते है
    यू ही अरमानो के दिये न जला बैठ जाना तन्हा श्याह रातो में

  • nikhilkhandelwal 104w

    ©nikhilkhandelwal
    के मैं जो जिया तोह क्या कम जिया
    मैं तोह तेरी याद में हर दम जिया
    पूछ तो ले जरा मेरे दिल से अये रहबर
    तेरे जाने के बाद कुछ लम्हा दो लम्हा ही कम जिया